राज्यसभा ने ₹54,067 करोड़ के व्यय हेतु विनियोग विधेयक पारित किया
पाठ्यक्रम: जीएस-2/ संविधान एवं शासन व्यवस्था
सन्दर्भ
- राज्यसभा ने विनियोग विधेयक, 2026 पारित किया, जिसके तहत वित्त वर्ष 2022–23 में किए गए व्यय के लिए अतिरिक्त अनुदान (Excess Grants) के रूप में भारत की संचित निधि से ₹54,067.44 करोड़ निकालने की अनुमति दी गई।
विनियोग विधेयक क्या है?
- विनियोग विधेयक भारत के संविधान के अनुच्छेद 114 के तहत प्रस्तुत किया जाता है। इसका उद्देश्य सरकारी व्यय को पूरा करने के लिए भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से धन निकालने की अनुमति देना है।
- यह लोकसभा द्वारा पहले से स्वीकृत धनराशि तथा अनुच्छेद 114(3) के तहत अधिकृत भारित व्यय (Charged Expenditure) के विनियोग से संबंधित होता है।
- इस विधेयक में कोई संशोधन नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसका उद्देश्य पहले से स्वीकृत व्यय के लिए केवल अनुमति प्राप्त करना है।
- इसे अनुच्छेद 113 के तहत लोकसभा द्वारा अनुदानों की मांगों (Demands for Grants) पर मतदान किए जाने के बाद प्रस्तुत किया जाता है।
अतिरिक्त अनुदान (Excess Grants) क्या हैं?
- अतिरिक्त अनुदान तब आवश्यक होते हैं जब किसी वित्तीय वर्ष के दौरान वास्तविक व्यय संसद द्वारा मूल रूप से स्वीकृत राशि से अधिक हो जाता है।
- पूरक, अतिरिक्त या अतिरिक्त अनुदान के मामलों में अनुच्छेद 115 के तहत एक अलग विनियोग विधेयक भी प्रस्तुत किया जाता है, ताकि संचित निधि से अतिरिक्त राशि निकालने की अनुमति मिल सके।
- इन्हें वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद प्रस्तुत किया जाता है और संसदीय स्वीकृति से पहले लोक लेखा समिति (PAC) द्वारा इनकी जाँच की जाती है।
स्रोत: TH
गुड समैरिटन (Good Samaritan)योजना
पाठ्यक्रम: जीएस-2/ शासन व्यवस्था
सन्दर्भ
- वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पिछले पाँच वर्षों में केवल 813 लोगों को गुड समैरिटन योजना के अंतर्गत पुरस्कार दिया गया है
परिचय
- इसे 2021 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा शुरू किया गया था।
- राहगीर, जिन्हें गुड समैरिटन या राह-वीर कहा जाता है, सड़क पर लोगों की जान बचाने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से हैं। वे अक्सर सड़क दुर्घटना के घटनास्थल पर सबसे पहले पहुँचने वाले सहायता प्रदाता होते हैं।
- यह योजना उस व्यक्ति को ₹25,000 का पुरस्कार प्रदान करती है, जो किसी दुर्घटना पीड़ित को “गोल्डन ऑवर” अर्थात गंभीर दुर्घटना के बाद के पहले 60 मिनट के भीतर अस्पताल पहुँचाने में सहायता करता है।
- पहले पुरस्कार की राशि ₹5,000 थी।
- लोगों को दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने तथा दूसरों को जीवन बचाने के लिए प्रेरित करने हेतु नकद पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र की व्यवस्था की गई है।
योजना के अंतर्गत आँकड़े
- वर्ष 2021-22 में केवल 77 गुड समैरिटन को पुरस्कार दिया गया, इसके बाद 2022-23 में 75, 2023-24 में 384, 2024-25 में 177 तथा 2025-26 में 100 लोगों को पुरस्कार दिया गया।
- उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, बिहार और आंध्र प्रदेश देश में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली कुल मौतों में लगभग दो-तिहाई के लिए जिम्मेदार हैं।
- इन आठ राज्यों में राजस्थान ने सबसे अधिक संख्या में गुड समैरिटन को पुरस्कार दिया, इसके बाद बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का स्थान रहा।
- पिछले पाँच वर्षों में दो राज्यों में योजना के अंतर्गत किसी भी लाभार्थी को पुरस्कार नहीं दिया गया।
स्रोत: IE
ब्लू ज़ोन
पाठ्यक्रम: जीएस-2/ स्वास्थ्य
सन्दर्भ
- ओकिनावा, जापान, जो विश्व के मान्यता प्राप्त ब्लू ज़ोन में से एक है, अपनी उच्च जीवन प्रत्याशा और स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए वैश्विक ध्यान आकर्षित कर रहा है।
ब्लू ज़ोन क्या हैं?
- ब्लू ज़ोन ऐसे भौगोलिक क्षेत्र होते हैं, जहाँ लोग औसत की तुलना में अधिक लंबा और स्वस्थ जीवन जीते हैं तथा 100 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों (शतायु) की असाधारण संख्या पाई जाती है।
- इस अवधारणा को पत्रकार डैन ब्यूटनर, जनसांख्यिकीविद् मिशेल पौलेन और चिकित्सक जियानी पेस ने असाधारण दीर्घायु वाले क्षेत्रों का अध्ययन करने के बाद विकसित किया।
मान्यता प्राप्त पाँच ब्लू ज़ोन हैं:
- ओकिनावा (जापान)
- सार्डिनिया (इटली)
- निकोया प्रायद्वीप (कोस्टा रिका)
- इकारिया (ग्रीस)
- लोमा लिंडा, कैलिफोर्निया (संयुक्त राज्य अमेरिका)
स्रोत: TH
फरक्का संधि
पाठ्यक्रम: जीएस-2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
सन्दर्भ
- 1996 की फरक्का संधि के 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने की संभावना के बीच, बिहार की भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसके प्रावधानों की समीक्षा करने की मांग उठाई गई है।
परिचय
- फरक्का संधि, जिसे गंगा जल संधि के नाम से भी जाना जाता है, पर 12 दिसंबर 1996 को भारत के प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के बीच हस्ताक्षर हुए थे।
- यह संधि फरक्का बैराज पर गंगा के जल के बँटवारे को नियंत्रित करती है। कम प्रवाह की अवधि (11 मार्च–11 मई) के दौरान, जल की उपलब्धता के आधार पर 10-10 दिनों की अवधि में बारी-बारी से प्रत्येक देश को 35,000 क्यूसेक पानी आवंटित किया जाता है।
- फरक्का बैराज, जो पश्चिम बंगाल में भागीरथी नदी पर निर्मित है, का निर्माण कोलकाता बंदरगाह की नौवहन क्षमता में सुधार करने के लिए किया गया था। इसके लिए पानी को हुगली नदी में मोड़ा गया।
- अनुच्छेद XII में प्रावधान है कि 30 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद आपसी सहमति से संधि का नवीनीकरण किया जा सकता है।
स्रोत: TOI
भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए उपाय
पाठ्यक्रम: जीएस-3/ अर्थव्यवस्था
चर्चा में क्यों?
- सरकार ने ईरान, होर्मुज़ जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी तथा आसपास के जलक्षेत्रों में सुरक्षा तनाव के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक रूपरेखा लागू की है।
नाविकों की सुरक्षा
- नाविक वैश्विक अर्थव्यवस्था को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और विश्व के 80% से अधिक व्यापार का परिवहन करते हैं।
- भारत विश्व में नाविकों के सबसे बड़े प्रदाताओं में से एक है और भविष्य के लिए तैयार समुद्री कार्यबल के निर्माण हेतु कल्याण, कौशल विकास एवं पुनःकौशल विकास पहलों को मजबूत करने पर ध्यान देना आवश्यक है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा: प्रमुख उपाय
- ‘नाविक-प्रथम’ रूपरेखा: सरकार ने बढ़ते तनाव के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए ‘Seafarer-First’ रूपरेखा अपनाई है।
- सुरक्षा परामर्श: सरकार ने 2026 में कई DGS परिपत्र जारी किए हैं, जिनमें संघर्ष क्षेत्रों में संचालन न करने, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर यात्राओं को प्रतिबंधित करने, जहाजों पर सुरक्षा अभ्यास अनिवार्य करने, यात्रा-विशिष्ट जोखिम आकलन करने, ISPS कोड का अनुपालन करने तथा नाविकों से तेहरान स्थित भारतीय दूतावास में पंजीकरण कराने की सिफारिश की गई है।
- ई-नाविक पोर्टल: सरकार ने 1 जुलाई 2026 से प्रभावी ई-नाविक पोर्टल के माध्यम से भारतीय नाविकों की निगरानी एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत किया है। यह पोर्टल 24×7 डिजिटल रिपोर्टिंग, संकट प्रबंधन एवं शिकायत निवारण की सुविधा प्रदान करता है।
- ऑनलाइन जहाज रिपोर्टिंग प्रणाली उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों की वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराती है।
- कंपनी सुरक्षा अधिकारियों (Company Security Officers) को जहाज एवं चालक दल का विवरण DG संचार केंद्र को प्रस्तुत करना होता है।
- संचार एवं निगरानी: 24×7 नियंत्रण कक्ष और DG संचार केंद्र (MMDAC) भारतीय नौसेना के साथ मिलकर कार्य करते हैं।
- नियमित सुरक्षा परामर्श एवं नौवहन चेतावनियाँ जारी की जाती हैं तथा आपातकालीन संचार प्रोटोकॉल स्थापित किए गए हैं।
- निकासी एवं स्वदेश वापसी: 60 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं तथा 3,972 भारतीय नाविकों को खाड़ी क्षेत्र से स्वदेश वापस लाया गया है।
- नाविक कल्याण कोष सोसायटी: यह संस्था लगातार जानकारी, कल्याण परामर्श तथा मृत्यु की स्थिति में परिवारों को ₹10 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- नियंत्रित तैनाती: भारतीय नाविकों का रोजगार केवल लाइसेंस प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है, जिनका अनुमोदन, तैनाती संबंधी प्रतिबंधों के अनुपालन तथा सुरक्षित प्रवासन प्रक्रियाओं के लिए सत्यापन किया गया है।
- सहमति-आधारित चालक दल परिवर्तन: संघर्ष क्षेत्रों में आपातकालीन चालक दल परिवर्तन केवल नाविक की स्पष्ट सहमति से तथा निर्धारित कानूनी एवं सुरक्षा ढाँचे के अंतर्गत ही किया जा सकता है।
- सरकार ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से तैनाती को हतोत्साहित करने के लिए परामर्श जारी किए हैं, ताकि नाविकों को जोखिमपूर्ण यात्राओं के लिए बाध्य न किया जाए।
- जोखिम प्रकटीकरण एवं उचित जाँच: शिपिंग कंपनियों एवं एजेंसियों को नाविकों की नियुक्ति से पहले उन्हें यात्रा मार्ग, सुरक्षा जोखिम, जहाज का विवरण, बीमा तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में संभावित जोखिम के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
- शिकायत निवारण: आपातकालीन सहायता एवं शिकायत निवारण के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन, व्हाट्सऐप सहायता, ई-मेल सहायता, ई-नाविक पोर्टल तथा DG संचार केंद्र के माध्यम से 24×7 सहायता प्रणाली उपलब्ध कराई गई है।
स्रोत :PIB
तृतीय पक्ष (Third Party) बीमा कवरेज
पाठ्यक्रम: GS2/ शासन व्यवस्था
सन्दर्भ
- सर्वोच्च न्यायालय ने नए वाहनों के लिए अनिवार्य तृतीय-पक्ष मोटर बीमा कवरेज को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है।
तृतीय-पक्ष बीमा कवरेज
- तृतीय-पक्ष देयता बीमा ऐसी बीमा पॉलिसी है, जो किसी बीमा कंपनी से खरीदी जाती है और पॉलिसीधारक के कार्यों के कारण किसी तीसरे पक्ष को हुए नुकसान के संबंध में किए गए दावों से पॉलिसीधारक को सुरक्षा प्रदान करती है।
- तृतीय-पक्ष देयता बीमा का एक सामान्य उदाहरण कार बीमा है, जो दुर्घटना की स्थिति में अन्य वाहन चालकों द्वारा किए गए दावों से आपकी सुरक्षा करता है।
- मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार सभी वाहन मालिकों के लिए यह एक वैधानिक आवश्यकता है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश
- अब नई कारों के लिए चार वर्ष तथा दोपहिया वाहनों के लिए छह वर्ष का बीमा कवरेज होगा।
- सर्वोच्च न्यायालय ने 2018 में एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ मामले में नए वाहनों के खरीदारों के लिए कारों पर तीन वर्ष तथा दोपहिया वाहनों पर पाँच वर्ष का तृतीय-पक्ष बीमा अनिवार्य किया था।
- न्यायालय ने केंद्र को एक पायलट परियोजना तैयार करने का निर्देश दिया, जिसके तहत वैध बीमा प्राप्त होने तक पेट्रोल पंपों पर वाहनों को ईंधन देने से इनकार किया जा सके।
- राजमार्गों एवं सड़कों पर यातायात उल्लंघनों का पता लगाने के लिए लगाए गए स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरों (ANPR Cameras) को भारतीय बीमा सूचना ब्यूरो (IIB) द्वारा रखे गए बीमा संबंधी आँकड़ों तथा VAHAN पोर्टल पर उपलब्ध वाहन पंजीकरण आँकड़ों के साथ एकीकृत किया जाएगा।
- राज्य पुलिसकर्मियों को IIB और VAHAN डेटाबेस से जुड़े मोबाइल अनुप्रयोग उपलब्ध कराए जाएंगे।
तृतीय-पक्ष बीमा अनिवार्य करने की आवश्यकता
- मोटर वाहन अधिनियम (MVA) की धारा 146 के तहत अनिवार्य बीमा का उद्देश्य केवल सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा देना ही नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया में न उलझना पड़े।
- वाहनों के बिना बीमा के रहने का परिणाम यह होता है कि दुर्घटना के पीड़ितों एवं उनके परिवारों के पास उचित समयावधि के भीतर पर्याप्त मुआवजा प्राप्त करने का कोई प्रभावी उपाय नहीं रह जाता।
स्रोत: TH
अग्नि-4
पाठ्यक्रम: जीएस-3/ रक्षा
सन्दर्भ
- भारत ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया।
परिचय
- अग्नि-4 एक दो चरणों वाली, सतह से सतह पर मार करने में सक्षम, परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जो ठोस ईंधन वाले रॉकेट मोटरों से संचालित होती है।
- इसकी मारक क्षमता 4,000 किमी तक है और यह भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता का एक महत्वपूर्ण घटक है।
- यह मिसाइल 20 मीटर लंबी, 1.3 मीटर व्यास वाली है, इसका वजन लगभग 17 टन है तथा यह लगभग 1,000 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकती है।
- इसे सड़क-गतिशील, स्व-निहित प्रक्षेपक (Launcher) से प्रक्षेपित किया जा सकता है, जिससे इसकी जीवित रहने की क्षमता (Survivability) तथा परिचालनिक लचीलापन बढ़ता है।
- अग्नि-4 भारत की अग्नि श्रृंखला की बैलिस्टिक मिसाइलों का हिस्सा है, जिसमें अग्नि-I, अग्नि-II, अग्नि-III, अग्नि-IV, अग्नि-V तथा नवीन अग्नि-प्राइम शामिल हैं।


स्रोत: TOI
पर्यावरण संरक्षण के लिए डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन पुरस्कार
पाठ्यक्रम: पुरस्कार
चर्चा में क्यों?
- रामनाथपुरम की पी. पेचियम्मल और विल्लुपुरम की गोविंदम्मल को पर्यावरण संरक्षण के लिए डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन पुरस्कार 2026 (Dr. M. S. Swaminathan Award) प्रदान किया गया।
क्या आप जानते हैं ?
- पेचियम्मल को तटीय क्षेत्रों से भूतिया मछली पकड़ने के उपकरण (Ghost Fishing Gear)—जैसे छोड़े गए मछली पकड़ने के जाल, नायलॉन की रस्सियाँ और प्लास्टिक कचरा—एकत्र करने में अग्रणी भूमिका के लिए सम्मानित किया गया। इस पहल से समुद्री प्रदूषण को कम करने में मदद मिली है।
- गोविंदम्मल को सतत कृषि को बढ़ावा देने, किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध कराने तथा उन्नत कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
पर्यावरण संरक्षण के लिए डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन पुरस्कार
- इसकी स्थापना रोटरी क्लब ऑफ मद्रास ईस्ट (RCME) द्वारा इसके मानद सदस्य एवं कृषि वैज्ञानिक स्वर्गीय एम. एस. स्वामीनाथन(M.S. Swaminathan) के नाम पर की गई थी।
- इसे कैविनकेयर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
- यह पुरस्कार किसी ऐसे व्यक्ति, कंपनी या गैर-सरकारी संगठन (NGO) को प्रदान किया जाता है, जिसने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता को बढ़ावा देने में योगदान दिया हो।
एम. एस. स्वामीनाथन
जन्म एवं प्रारंभिक जीवन
- उनका जन्म 7 अगस्त 1925 को कुंभकोणम, तमिलनाडु में हुआ था।
- 1942–43 के बंगाल अकाल को देखने के बाद उन्होंने चिकित्सा के बजाय कृषि को चुना। उनका मानना था कि बेहतर फसल किस्में किसानों के जीवन को बदल सकती हैं और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं।
योगदान
- हरित क्रांति: उन्होंने 1960 और 1970 के दशक में हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने भारत को खाद्य कमी एवं आयात पर निर्भरता से खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर परिवर्तित किया।
वैज्ञानिक प्रयास:
- उन्होंने 1954 में केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में उर्वरक-प्रतिक्रियाशीलता में सुधार के लिए उच्च उपज देने वाली चावल की किस्मों के विकास हेतु अनुसंधान शुरू किया।
- उन्होंने ऐसी अर्ध-बौनी एवं उर्वरक-प्रतिक्रियाशील गेहूँ की किस्मों की आवश्यकता को पहचाना, जिनमें फसल गिरने की समस्या न हो।
- उन्होंने नॉर्मन ई. बोरलॉग और ऑरविल वोगेल के साथ मिलकर मैक्सिकन बौनी गेहूँ की किस्मों को भारत में प्रस्तुत किया, जिससे 1960 के दशक के अंत तक भारत में गेहूँ क्रांति की शुरुआत हुई।
- वे फिलीपींस स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के महानिदेशक (1982–88) बनने वाले पहले भारतीय थे और उनके नेतृत्व को 1987 में प्रथम विश्व खाद्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पर्यावरण संरक्षण
- उन्होंने ओडिशा के केंद्रापड़ा जिले में मैंग्रोव के पुनर्स्थापन तथा तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए व्यापक कार्य किया।
- उन्होंने 1999 में जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों के न्यासी प्रबंधन (Trusteeship Management) की अवधारणा प्रस्तुत की।
- वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) के सहयोग से उन्होंने मन्नार की खाड़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र न्यास की स्थापना में सहायता की।
- उन्होंने 2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद भविष्य की आपदाओं से तटीय समुदायों की रक्षा के लिए बड़े पैमाने पर मैंग्रोव वृक्षारोपण की वकालत की।
किसानों का कल्याण
- राष्ट्रीय किसान आयोग (2004–06) के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सिफारिश की कि किसानों को लाभकारी आय सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) उत्पादन की भारित औसत लागत से कम से कम 50% अधिक (C2+50%) होना चाहिए।
पुरस्कार:
- वर्ष 2024 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
- हरित क्रांति को सफल बनाने वाले उनके दूरदर्शी नेतृत्व के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा उन्हें “आर्थिक पारिस्थितिकी के जनक” (Father of Economic Ecology) के रूप में मान्यता दी गई।
स्रोत :TH
Previous article
अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) कोष के अंतर्गत ऋण वितरण
Next article
संक्षिप्त समाचार 07-08-2026